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उम्मीद

  ना उम्मीद कर किसी से नसीहत देते हैं, अपने भी । हाँ, क्यूँ करना चाहिए , क्या जरूरत है । रिश्ते, नाते ,एहसास सब बेमानी है। कौन कितने कदम साथ रहेगा, यह वक्त और जरूरत तय करेगा, तेरे जज्बात नहीं ।। सांसे चलानी है तो वक्त के साथ परिभाषा बदल ले अपनों की, अपनी धड़कन की , नसीहत बिठा ले मन में ।। पर, बार बार टूटने पर भी ना समझ पायेगा तू दिमाग गिरवी जो रख दिया है अपनों के पास ।।

अनजान शहर

अनजान शहर,अनजाने लोग अन्तर्मन को छू गई उसकी इक पहल । बारिश में भिगती दुकान-दुकान डोलती, जिस शिद्दत से वो ढूँढती प्रकृति उस भाव को कहीं साथ- साथ भेजती । कहने को तो औपचारिकता थी पर , उनके जीवन की दिशा बदलने वाली थी । खुद उसे भी था कहां पता नियति जो उससे कराने वाली थी । बस हुए जा रहा था, अनजानी राहों पर पथिक बढे जा रहे थे । ना संवादों की जरुरत ना अतीत को जानने की चाहत बस,झील सी आंखों मे उतर जाने की आकुलता थी । हर कदम संवेदना के आवेग को पकड़ अपनी चाहत की चाशनी में डूबा ऐसा प्रत्युतर देती प्यास बढती ही जाती मानो, उम्र घटती ही जाती थी । जीने की ललक बढ़ा, और जिन्दादिली सीखा सकुचाते, शरमाते रिश्ते को विन्दास बना जिलाया था जीवन को धन्य बनाया था । संबल बन एक दूजे का आदर कर उस चाहत का जो अन्तर्मन मे जागे थे, उन कोमल, बाल सुलभ खिलवाडो का उन दुपहरीया, उन शामों का उन मजबूर बेचैन दूरियों का पल- पल सींचते उन नातों का बे सिर पैर की बातों का कुछ तो था सोचा नियति का इन दर्द भरे अरमानो का ।।

संघर्ष

संघर्ष सपनों के हकीकत से हकीकत के सपनों का । अपनों की खुशियों में खोये स्थूल से जीवन के अस्तित्व का ।। हिम्मत की नींव से उसके अपने दर्द का । अन्तर्मन के भावों का भौतिक परिभाषाओं से ।। जी चुकी सांसों का महसूस हो रही हवाओं से । आचरण के संबल से शब्दों के नसीहत का ।। जिए पलों की नरमी से मौसम की गरमी का । आत्मा के बन्धन से मन की उलझन का ।। एहसास के मौन सवालों से बुद्धि के बोलते जबाबों का । फूलों की खुशबू से काँटो की चुभन का । सत्य से किस्मत का ।।
दोस्तों ,           ब्लॉग की दुनिया में बहुत दिनों से शामिल होना चाह रहा था,पर किसी न किसी कारण रूबरू नहीं हो पा  रहा था। मौजूदा मनोभावों ने मजबूर किया तो आना ही पड़ा।   विश्वास है स्वीकार करेंगे।